आयुर्वेद और स्वास्थ्य: जल एवं पद-यात्रा का ब्रह्मांडीय महत्व
"पहला सुख निरोगी काया।"
स्वास्थ्य ही मनुष्य का सबसे बड़ा धन है। MAHADEV ASTROLOGER M.A. के अनुसार, हमारा भौतिक शरीर पंच तत्वों (अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश) से निर्मित है। इन सभी में 'जल' तत्व का संतुलन अत्यंत आवश्यक है क्योंकि हमारे शरीर का लगभग 70 प्रतिशत भाग जल ही है। जब हमारे शरीर में जल और वायु का संतुलन बिगड़ता है, तब त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) उत्पन्न होते हैं।
सटीक जल पान (Water Intake Science)
आयुर्वेद का स्पष्ट निर्देश है कि प्रत्येक व्यक्ति की जल की आवश्यकता उसके भार (Weight) पर निर्भर करती है। सामान्य रूप से, प्रत्येक 1 किलोग्राम भार के लिए 33 मिली-लीटर जल की आवश्यकता होती है। यदि आप उचित मात्रा में जल ग्रहण करते हैं, तो आपकी नाड़ियाँ शुद्ध रहती हैं और 'नाद योग' (Sound Healing) का प्रभाव शरीर पर शीघ्र होता है।
दैनिक पद-यात्रा (Daily Steps & Walking)
आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आयुर्वेद दोनों यह प्रमाणित करते हैं कि नियमित पद-यात्रा (चलना) हृदय और पाचन तंत्र के लिए अमृत के समान है। ब्रह्म मुहूर्त में की गई पद-यात्रा से मस्तिष्क को शुद्ध प्राणवायु (Oxygen) प्राप्त होती है, जिससे मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। अपने शारीरिक सूचकांक (BMI) के आधार पर 7,000 से 10,000 कदम प्रतिदिन अवश्य चलना चाहिए।